May 11, 2021

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चुनावी साल में हाल बेहाल, सरकार ऐसे कैसे करेगी सबको खुशहाल ?

उत्तराखंड- चुनावी साल शुरु होते ही भाजपा सरकार ने शिक्षकों की सालों से बंद पड़ी फाइलों की धूल को झाड़ना शुरु कर दिया है. बेसिक से माध्यम स्तर के शिक्षकों के दस प्रमुख पदों पर खासा ध्यान दिया जा रहा है.

जिस पर शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने सचिव और निदेशक को इनके समाधान तलाशने के निर्देश दिए हैं. 18 जनवरी को सचिवालय मे मंत्री इन प्रमुख मुद्दों समेत 26 विभिन्न विषयों का परीक्षण करवाया गया. बताया जा रहा है, कि बेसिक से माध्यमिक स्तर तक कार्यरत 60 हजार से ज्यादा स्थायी शिक्षकों के साथ ही शिक्षा मित्रों और अतिथि शिक्षकों की समस्याएं कई साल से उलझी पड़ी हैं. इन शिक्षकों की मांगों की फेहरिस्त तो काफी लंबी है, लेकिन ज्यादा नाराजगी इन 10 मुद्दों पर हैं.

सरकार से शिक्षकों की 10 मुख्य मांगे
फाइल फोटो- सरकार से शिक्षकों की 10 मुख्य मांगे

-सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के मुताबिक चयन-प्रोन्नत में पे–स्केल बढोत्तरी का लाभ.
-एक जनवरी 2006 के बाद पदोन्न्त शिक्षकों से अतिरिक्त पे-स्केल की वसूली पर सरकार रोक.
-बेसिक से एलटी में समायोजित किए गए शिक्षकों को चयन और प्रोन्नत वेतनमान में पूर्व की सेवा का लाभ.
-बेसिक स्कूलों में तैनात औपबंधिक, नॉन टीईटी औपबंधिक और नॉन टीईटी शिक्षा मित्रों के नियमितीकरण का मुद्दा.
-प्राइवेट स्कूलों के पीटीए शिक्षकों को तदर्थ नियमितीकरण का लाभ
-हेडमास्टर और प्रिंसीपल के हजार से ज्यादा खाली पदों पर प्रमोशन
-गेस्ट टीचर्स का मानदेय बढ़ाने और गृह जिले में उनकी नियुक्ति
-उच्च शिक्षा विभाग के समान विद्यालयी शिक्षकों को यात्रा के लिए अवकाश
-नियुक्ति में देरी और चुनाव आचार संहिता के कारण देर से ज्वाइन करने वालों को पेंशन का लाब
-तबादला एक्ट का सौ फीसदी पालन

चुनावी साल में हाल बेहाल, सरकार कैसे करेगी सबको खुशहाल
फाइल फोटो- चुनावी साल में हाल बेहाल, सरकार कैसे करेगी सबको खुशहाल

पिछली सरकार के समय भी इन समस्याओं का हल नहीं निकल पाया था. वर्तमान सरकार के कई बार आश्वासन देने के बाद भी हालात जस-के-तस बने हुए हैं. चुनावी साल को देखते हुए सरकार शिक्षकों को खुश करना चाह रही है, जिसके तहत वो शिक्षकों को सबसे अधिक प्रभावित करने वाली समस्याओं का कुछ न कुछ हल निकालना चाह रही है.
सभी जानते हैं, कि उत्तराखंड की सियासत में शिक्षक और कर्मचारी हमेशा अहम भूमिका निभाते हैं. इसलिए सरकार इनमें से किसी भी वर्ग को नाराज नहीं करना चाहती.

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