April 11, 2021

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गैरसैंण में प्रर्दशनकारियों पर लाठीचार्ज

गैरसैंण में प्रर्दशनकारियों पर लाठीचार्ज

गैरसैंण : प्रदर्शनकारियों पर लाठियों का प्रहार, ठंड में पानी की बौछार, सरकार के ख़िलाफ़ हा-हा-कार !

उत्तराखंड: चमोली गैरसैंण. बजट सत्र के पहले ही दिन जिसका डर था, वही हुआ. सरकार को जो चेतावनी दी गई थी, उसको अमलीजामा पहनाने की आंदोलनकारियों ने पूरी कोशिश की. भले ही सरकार ने उस कोशिश को ठंड में पानी की तेज़ बौछारों से कुचलने की कोशिश की हो या फिर लाठियों के दम पर उस कोशिश को नाकाम करने की नाकाम कोशिश.

चलिए अब सीधे अब मुद्दे पर आते हैं. दरअसल ग्रीष्मकालीन राजधानी में बजट सत्र के पहले ही दिन जो कुछ हुआ, उसकी ज़िम्मेदार पूरी तरह से सरकार है. क्योंकि अगर वो सूझबूझ से काम लेती, तो जो कुछ भी गैरसैंण में हुआ उसे टाला जा सकता था. राज्य के चमोली ज़िले में एक सड़क के चौड़ीकरण की मांग को लेकर पिछले 84 दिनों यानि तकरीबन 3 महीने से एक आंदोलन चल रहा है. मानव श्रंखला से लेकर तिरंगा प्रदर्शन जैसे तामाम शांति पूर्ण तरीके से प्रदर्शन किए गये. लेकिन सरकार की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई.

इन आंदोलनकारियों ने सरकार को कई बार देहरादून में आकर आँदोलन करने तक की चेतावनी दी, लेकिन सरकार के किसी भी नुमाइंदे ने इन आंदोलनकारियों से बात करने तक की ज़हमत नहीं उठाई. मांग सिर्फ सड़क के चौड़ीकरण की थी. वो भी तब जब खुद राज्य के तमाम भाषणों में, राज्य के अलग अलग हिस्सों में सीएम साहब लगातार सड़कों के नेटवर्क बिछाने के बजट से लेकर उनकी लंबाई-चौड़ाई तक गिनाते नज़र आते हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री रावत का सड़क के चौड़ीकरण की मांग को नज़रअंदाज कर देना समझ से परे है. कि आखिर वो इस छोटी सी मांग को कैसे नज़रअंदाज़ कर सकते हैं.

अपनी अनदेखी देख सड़क आंदोलनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी, कि वो गैरसैंण में होने वाले बजट सत्र के दिन विधानसभा का घेराव करने पहुंचेंगे. आंदोलनकारियों की इस चेतावनी को लरकार ने तो हल्के में लिया लेकिन बिना मुद्दों के बैठे विपक्षी दलों ने इसे फौरन कैश करा लिया. या यूं कहें कि बहती गंगा में विपक्षियों ने हाथ धोने का भरपूर मौका ढूंढ़ लिया. जिसने बिना वक्त गंवाए आंदोलनकारियों के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ आंदोलन को और उग्र कर दिया.

गैरसैंण में पहली मार्च को हुए बजट सत्र के पहले ही दिन आंदोलनकारियों ने हंगामा बरपा दिया. पुलिस ने इन आंदोलनकारियों को रास्ते में ही रोक दिया. लेकिन जब प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस के साथ उनकी झड़प शुरू हो गई.

हालात बेकाबू होते देख पूरे इंतज़ाम के साथ मौका-ए-वारदात पर पहले से ही मौजूद पुलिस ने ठंड में ही पानी की तेज़ बौछारों का सहारा लेना शुरू किया. ताकि ठंड़ से आंदोलनकारी तितर-बितर हो जाएँ, लेकिन पुलिस का ये पैंतरा फेल हो गया. पानी की बौछारों के बीच आंदोलनकारियों ने नाचना शुरू कर दिया. यकीन न हों तो नीचे वाले वीडियो को ज़रूर देंखें.

ठंडक में पानी की बौछारों का पैंतरा फेल होने के बाद एक बार फिर आंदोलनकारियों ने बैरिकेडिंग पर धावा बोला. इस बीच फिर से पुलिस और आंदोलनकारियों की झड़प हुई. और इस बार बात पानी की बौछारों से नहीं, बल्कि जवानों के हाथों में लप-लपाती लाठियों से हुई. दे- दना-दन पुलिस की लाठियां चलनी शुरू हो गईं. इसके बाद आंदोलनकारियों के बीच भगदड़ मचना शुरू हुई.

इस पूरे घटनाक्रम में स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को ये दोनों सहारे लेने पड़े. पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हुई झड़प में कई ग्रामीणों के साथ साथ कई जवानों को भी हल्की चोटें आई. चूंकि आंदोलन में महिलाएं भी शामिल थीं, लिहाजा पुलिस के लाठीचार्ज में महिलाएं भी घायल हुईं.

लेकिन पुलिस पक्ष की मानें तो लाठीचार्ज हुआ है प्रदर्शनकारियों के पुलिस पर पत्थर और बोतलें फेंकने के बाद. जबकि प्रदर्शनकारियों में शामिल महिलाओं ने आरोप लगाया है, कि पहले पुलिस ने लाठीचार्च किया, उसके बाद ग्रामीणों ने पथराव किया.

नंदप्रयाग घाट विकासखंड के ग्रामीणों का सड़क चौड़ीकरण को लेकर चल रहे आंदोलन को तकरीबन 3 महीने बीतने को हैं. गांव वालों की एक छोटी सी मांग थी, कि सिंगिल लेन सड़क को चौड़ा कर दिया जाए. जबकि आंदोलन से पहले खुद सरकार के मुखिया ने ही इसके चौड़ीकरण की घोषणा की थी, और तो और पूर्व सीएम ने भी इस सड़क को चौड़ा करने का वादा किया था. लेकिन वादे हैं वादों का क्या.

लगातार सड़क चौड़ी करने की मांग को लेकर ग्रामीणों में अपनी अनदेखी को लेकर आक्रोश पनप रहा था. और वहीं आक्रोश सोमवार के रोज़ बजट सत्र के पहले दिन देखने को मिला. जो सरकार की सूझबूझ से टल सकता था. सरकार की ज़रा सी अनदेखी ने विरोधियों को बैठे बिठाए उसके खिलाफ आंदोलन का एक मौका दे दिया. बहरहाल अब भी वक्त है, सरकार को अपनी भूल सुधारने का और विरोधियों को चारों खाने चितत् करने का. देखते हैं सरकार इस घटना के बाद क्या रूख अपनाती है.

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