April 11, 2021

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पुलिस पर पथराव

मॉब लिंचिंग की कोशिश और पुलिस पर पथराव करने वाले नहीं हो सकते प्रदर्शनकारी !

उत्तराखंड, गैरसैंण , हम जानते हैं कि इस पोस्ट का हेडिंग पढ़ते ही हमें मोदी-गोदी मीडिया करार दे दिया जाएगा. लेकिन हमें इस बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं. क्योंकि यूकेलाइव पहाड़ की आवाम की आवाज़ है. और हम हर उस पहाड़ के इंसान की आवाज़ को बुलंद करने का काम करेंगे, जिसकी बात सरकार या प्रशासन नहीं सुनेगा. लेकिन अगर कोई सरकार, विपक्ष या सरकारी ऐजेसिंयों पर आतंकियों और मॉब लिंचिंग करने वालों की तरह हमला करेगा, तो हम उसके विरूद्ध आवाज़ बुलंद करेंगे.

बजट सत्र के पहले दिन यानि 1 मार्च को सड़क चौड़ीकरण का आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में विधान सभा का घेराव किया. और विधान सभा में घुसने की नाकाम कोशिश की. लेकिन प्रदर्शनकारियों की जो तस्वीरें एक एक करके सामने आ रही हैं, वो हैरान परेशान कर देने वाली हैं.

देखिए और तय कीजिए !

परेशान कर देने वाली इन तस्वीरों को देखकर ये कतई नहीं लगता, कि ये वही लोग हैं, जिन्होंने सड़क चौड़ीकरण को लेकर ह्मयूमन चेन बनाई थी. जिन महिलाओं, बच्चों, बुज़ुर्गों और नौजवानों ने शांतिपूर्ण तरीके से सरकार के खिलाफ तिरंगा प्रदर्शन किया ,ये वो लोग नहीं हो सकते जो बेहद खौफनाक तरीके से पुलिस पर पथराव करते नज़र आ रहे हैं.

रूह तो उस वक्त सिहर उठती है, जब आप के सामने ट्विट्रर पर चमोली पुलिस की ट्विट की हुई वो तस्वीर सामने आती है, जिसमें प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच कुछ पुरुष और महिलाएं एक पुलिस वाले को बुरी तरह, इधर उधर धक्का देते नज़र आते हैं. बात इतने पर खत्म होती तो तस्वीर से रूह नहीं कांपती. कंपकपी तो तब उठी जब हमारी उत्तराखंड पुलिस का वो जवान जिसने कोरोना में न जाने कितने दिन-रात जागकर अपनी जान की परवाह किये बगैर हमारी सुरक्षा की होगी , उसी वर्दी वाले को प्रदर्शनकारियों की भीड़ में शामिल कुछ महिलाएं उसको बुरी तरह धक्का देकर उसके कपड़ों को फाड़ने का न सिर्फ प्रयास करती नज़र आईं, बल्कि अगर वक्त रहते उस जगह पर पुलिस के दूसरे जवान नहीं पहुंचने तो उस जवान की मॉब लिंचिंग होने जैसी घटना होने में देर नहीं लगती.क्योंकि भीड़ के गुस्से का कोी भरोसाी नहीं होता. यकीं न हो तो चमोली पुलिस के ट्विटर पर पोस्ट किये गये इस वीडियो की तस्वीरों को जूम करें और आंखें खोल कर देखें.

चलिए अब आपको एक और वीडियो दिखाते हैंं, इसे भी चमोली पुलिस ने ट्विट किया है. प्रदर्शनकारियों के नाम पर कुछ नौजवान एक छत पर चढ़े दिखते हैं जिनके हाथ में पत्थर और बोतलनुमा कुछ चीजें होती हैं, जो दनादन सड़क पर निकलती पुलिस और उनके वाहनों पर बेखौफ होकर इन्हें फेंकते नज़र आते हैं. आखिर कौन हैं ये लोग. जल्द ही इसका खुलासा होगा. क्योंकि इन सबके चेहरे साफ नज़र आ रहे हैं. देखिए चमोली पुलिस के द्वारा ट्विट की गई 14 सेकंड की ये वीडियो.

पुलिस पर पथराव और बोतल फेंकते कथित प्रदर्शनकारी

अब दिखाते हैं आपको एनालिसिस वीडियो, वो वीडियो जिसको देखकर साफ पता चल रहा है, कि पहले पुलिस ने लाठियां या पानी की धार को प्रदर्शनकारियों पर छोड़ा या फिर प्रदर्शनकारियों की भीड़ में छुपे अराजत तत्वों ने पुलिस पर पहले पथराव और बोतलें फेंकी. तस्वीरों का विशलेशषण करने पर साफ पता चल रहा है, कि जिस वक्त छत पर चढ़े ये शैतान नौजवान पुलिस पर पथराव और बोतलें फेंक रहे थे. उस वक्त तक सड़क गीली नहीं थी. गौर से वीडियो देखने पर साफ पता चल रहा है कि सड़क पर तमाम चीजें बिखरी पड़ीं हैं. और ये बिखरी पड़ी चीजें ही पत्थर और बोतलें हो सकती हैं.,

https://youtu.be/k2PvDsIDPXA

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी बात तो ये है, कि आखिर जिस छत या खुली जगह से तमाम नौजवान पुलिसकर्मियों और उनके वाहनों पर पथराव कर रहे थे, वहां इतनी तादाद में पत्थर और बोतलें कहां से आई. और अगर आंई तो एलआईयू यानि वहां की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट किस तरह से काम कर रही थी, कि वो इन सब बातों से बेखबर रही. यानि लोकल इंटेलिजेंस तंत्र पूरी तरह से फेल साबित हुआ. जो पुलिस महकमें के लिए एक बड़ी मुसीबत बनकर सामने आया. ईश्वर का धन्यवाद करिए कि किसी को जिंदगी से हाथ नहीं धोना पड़ा. लेकिन पुलिस महकमें को एलआईयू तंत्र को मजबूत करने की बेहद सख्त ज़रूरत है.

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