February 27, 2021

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तपोवन में तबाही की दास्तां

तपोवन में तबाही की पूरी दास्तां. कैसे टूटा ग्लेशियर और कैसे मची तबाही !

उत्तराखंड, चमोली, ग्लेशियर के फटने से भारी तबाही. दिनभर सब इन ख़बरों को देखते, पढ़ते और सुनते रहे. लेकिन क्या किसी ने सोंचा, कि आखिर क्यों और कैसे हुई ग्लेशियर फटने की ये घटना. अगर आप जानते हैं तो बहुत अच्छी बात और अगर नहीं तो चलिए हम बताते हैं कि सात साल बाद एक बार फिर से उत्तराखंड में तबाही का ये मंज़र हम सबको क्यों देखना पड़ा. तपोवन की तबाही की पूरी दास्तां. कैसे टूटा ग्लेशियर और कैसे मची तबाही !

UK LIVE TV तबाही का ख़ौफ़नाक मंजर !

कुदरत का क़हर. उत्तराखंड की आवाम के लिए कोई नई बात नहीं है. आज से ठीक 7 साल पहले भी कुदरत ने इससे भी भीषण क़हर बरपाया था. और एक बार फिर ग्लेशियर फटने से राज्य के चमोली ज़िले में भारी तबाही देखने को मिली है.

चमोली का रेणी गांव. गांव के पास ग्लेशियर. और यहीं पर है ऋषि गंगा पावर प्रजेक्ट. इस पॉवर प्रोजेक्ट में 7 फरवरी यानि संडे यानि इतवार के रोज़ करीब पौने 2 सौ से अधिक लोग , सूत्रों की माने तो तकरीबन 176 लोग काम कर रहे थे. अचानक से भड़भड़ा कर धौली गंगा नदी का बहाव किसी तूफान के माफिक चंद सेकंड़ों में ही रास्ते में पड़ने वाली हर चीज़ को अपने आवेग के साथ बहाता हुआ ले गया. यानि करीब 176 लोग उस वक्त वहां काम कर रहे थे. अगर आपने इस जलजले के शुरू होने की ये तस्वीरें नहीं देखीं तो ज़रूर देखिए. ताकि आप अंदाज़ा लगा सकें. कि खौफ़ का वो मंज़र कितना भयानक रहा होगा.

UK LIVE TV अनगिनत लोगों को बहा ले गया ये जलजला

चलिए अब असल मुद्दे पर चलते हैं. हम बात कर रहे थे, कि आखि़र वो ग्लेशियर अचानक से कैसे और क्यों फट गया. और कैसे चंद सेकंडों में भारी तबाही मचाते हुए तिनके के माफिक सब कुछ नेस्तेनाबूद कर गया. दरअसल आपको सबसे पहले बताते हैं कि ग्लेशियर होता क्या है. ये बनता कैसे है. चलिए आपको थोड़ा फ्लैश-बैक में लिए चलता हूं.

दरअसल इन ग्लेशियर से पहली बार मेरा सामना हुआ, साल 2000 में. जब मैं मानसरोबर यात्रा पर था. अपने ग्रुप में सबसे आगे-आगे और वो भी बिल्कुल अकेला चला जा रहा था. अचानक से रास्ते में बर्फ के बूंदी गांव के पास बर्फ के बड़े बड़े हिमखंड जैसे पहाड़ दिखाए दिये. पहले तो मैं सच कहूं, तो बेहद घबरा गया. ये सोंचकर कि कहीं ये टूट कर मुझे बहा न ले जाएं. ठीक वैसे ही जैसे 7 फरवरी के काले इतवार को हुआ. लेकिन फिर मैं डर के मारे उसी जगह पर ठहर गया और वापस पीछे लौट आया.

हिमखंड़ों से घिरे ग्लेशियर को पहली बार देखकर फूले हाथ-पांव
हिमखंड़ों से घिरे ग्लेशियर को पहली बार देखकर फूले हाथ-पांव

हमारे ग्रुप को और उस रास्ते के महारथी गाइड के आने के बाद मैंने उस बड़े से हिमखंड के बारे में उससे, जिज्ञासा से पूछना शुरू कर दिया. मैं जानता हूं. कि आप भी इसके बारे में उतनी ही जिज्ञासा से जानने को आतुर होंगे. तो चलिए आपको बताता हूं कि ये ग्लेशिय कैसे बनता है.

दरअसल पहाड़ों की ऊंची-ऊंची कम तापमान वाली वीरान चोटियों पर जहां जमकर बर्फबारी होती है. और सालों तक एक ही जगह वो बर्फ इक्ट्ठा होकर जमती रहती है. वो भी भारी मात्रा में. बस तो इसी भारी मात्रा में एक ही जगह जमने वाली बर्फ से बनते हैं बड़े बड़े हिमखंड यानि ग्लेशियर.

UK LIVE TV - ऊंची चोटियों पर एक ही जगह लगातार बर्फ जमने से बनते हैं ग्लेशियर
UK LIVE TV – ऊंची चोटियों पर एक ही जगह लगातार बर्फ जमने से बनते हैं ग्लेशियर

ये ग्लेशियर भी दो तरह के होते हैं. अगर आपने नेशनल जिओग्राफिक चैनल कभी देखा हो, तो शायद आप जानते हों. लेकिन कोई नहीं मैं आपको बताता हूं. ये दो तरह के होते हैं. पहला अल्पाइन और दूसरे आईस शीट्स. जो ग्लेशियर मुझे देखने को मिले थे यानि पहाड़ पर वो थे अल्पाइन ग्लेशियर.

अब आप भी मेरी तरह ही सोंच रहे होंगे, कि ये ग्लेशियर ऐसे कैसे टूट जाते हैं और फिर कैसे भारी तबाही मचाते हैं. तो इन ग्लेशियरों के टूटने के भी कई कारण होते हैं. लेकिन सबसे अहम कारण होता है गुरुत्वाकर्षण बल. तो वहीं ग्लेशियर टूटने की दूसरी बड़ी वजह होती है ग्लोबलर वॉर्मिंग और ग्लेशियर के किनारों पर तनाव.

UK LIVE TV - ग्लोबल वॉर्मिंग से पिघल रहे हैं ग्लेशियर
UK LIVE TV – ग्लोबल वॉर्मिंग से पिघल रहे हैं ग्लेशियर

हम सब जानते हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह ये ग्लेशियर साल-दर-साल तेज़ी से पिघल रहे हैं. जिसके चलते ये कई हिस्सों में टूट जाता है. अब इसके टुकड़े छोटे और बड़े भी हो सकते हैं. और ग्लेशियर के टूटकर अलग हुए इसी बड़े टुकड़े को कहते हैं काल्विंग. इस तरह के बड़े ग्लेशियर दो तीन सालों के अंतराल पर टूटते हैं.

UK LIVE TV – ग्लेशियर टूटने और पिघलने के बाद अलकनंदा में मिलने के बाद भारी तबाही मचाते

जब ग्लेशियर ग्लोबल वॉर्मिंग या किनारों पर तनाव की वजह से टूटकर अलग-अलग टुकड़ों में बंटता या फटता है तो इन टुकड़ों के अंदर भरा पानी बाहर निकलने का रास्ता बनाने लगता है. सरल भाषा में समझाऊ तो आपने बर्फ कि पघटली हुई सिल्ली को बीच से पानी बहते देखा होगा. ठीक इसी तरह ग्लेशियर के बीच से पानी बाहर निकने का रास्ता निकालकर तेजी से बहने लगता है. यानि ग्लेशियर तेजी से पिघलने लगता है. और ग्लेशियर के इसी बड़े टुकड़े से पिघलने वाला यही पानी बन जाता है ठीक वैसा ही सैलाव जो आपने ऊपर वीडियो में देखा.

UK LIVE TV तबाही का खौफनाक मंजर

ठीक ऐसा ही तपोवन में हुई इस भारी तबाही के दौरान देखने को मिला. ग्लेशियर का बड़ा टुकड़ा टूटा. उसमें पानी ने बाहर निकलने के लिए अपना रास्ता बनाया. पिघलने वाले ग्लेशियर के पानी ने अंदर ही अंदर बड़े सैलाव का रूप अख्तियार कर लिया और फिर वो फूट कर जब बाहर निकला तो नदियों का वेग भी बढ़ाता चला गया. जिससे अलकनंदा नदी का जल स्तर तेजी से बढ़ा और उसने ग्लेशियर के फटने से पैदा हुए पानी के सैलाव के साथ रौद्र रूप धारण कर लिया. और तबाही मचाता हुआ आवेग के साथ रास्ते में जो कुछ भी आया अंधा होकर सब कुछ बहाता हुआ ले गया. देखिए इस वीडियो में कैसे हुआ ये सब.

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