March 7, 2021

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ऋषिगंगा के मुहाने पर बनी करीब 400 मीटर लंबी झील, रहें सावधान-सीएम !

उत्तराखंड, आपदा के बाद से ही लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन का काम चल रहा है. लेकिन गुरूवार के रोज अचानक से जल स्त्र एक बार फिर से बढ़ा तो रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी टीमों ने फौरन काम रोक दिया. इसके सभी जवानों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया. अचानक से नदी का जल स्तर बढ़ने के चलते इलाके के जियोलॉजिस्ट एक बार फिर रैणी गांव जा पहुंचे. इसके बाद गांव वालों से मिलने पर उन्हें उस जगह पर ले जाया गया जहां से लैंडस्लाइड हुआ और फिर जलजला शुरू हुआ.

श्रीनगर यूनिवर्सिटी के जियोलॉजिस्ट नरेश राणा चमोली ज़िले की ऋषिगंगा के मुहाने पर जब गांव वालों के साथ पहुंचे, तो उन्होंने पूरे इलाके का सर्वेक्षण किया. और फौरन ही एक वीडि्यो के माध्यम से शासन प्रशासन सभी को भविष्य में आने वाले खतरे से आगाह किया. उन्होंने जो बताया वो सन्न कर देने वाला था. राणा जी कह रहे थे. कि जहां से आपदा शुरू हुई उसके पीछे तक एक बड़ी झील बन गई थी. और इसी झील से पानी रिस-रिस कर नदी का जलस्तर बढ़ा रहा है. जियोल़ॉजिस्ट नरेश राणा ने बताया कि ये आने वाली खतरे की घंटी है.

झील से रहें सावधान !

जियोलॉजिस्ट राणा के द्वारा दी गई जानकारी को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया. और फौरन ही एक्शन लेते हुए एनडीआरएफ की एक टीम रैणी गांव भेजी गई. तो रैणी गांव पहुंची NDRF की टीम ने जो देखा तो उनके भी होश फाख्ता हो गये. टीम ने फौरन ही अपने अफसरों से संपर्क साधा और पूरी जनकारी दी.

जानकारी में टीम के लीडर ने बताया कि ऋषिगंगा के मुहाने पर बाकई में एक बड़ी झील बन गई है. जिसका पानी स्थिर है. और उसी झील में से पानी हल्के हल्के रिस कर नदी का जल स्तर बढ़ा रहा है. मतलब श्रीनगर यूनिवर्सिटी के जियोलॉजिस्ट राणा के द्रारा गुरूवार को जो वीडियो जारी की गई थी वो जानकारी बिल्कुल दुरुस्त थी.

ऋषिगंगा पर बनी इस झील की जानकारी फौरन मुख्यमंत्री तक भी पहुंची. जिन्होंने ने जानकारी देते हुए बताया कि झील की लंबाई करीब 400 मीटर हो सकती है. लेकिन इसकी गहराई के बारे में अनुमान लगाना अभी मुश्किल है. इसके अध्यन के लिए वैज्ञानिकों के एक दल को झील के मुआअने के लिए रवाना कर दिया गया है.

लाल घेरे वाली नई बनी करीब 400 मीटर लंबी झील से ही हो रहा है रिसाव
लाल घेरे वाली नई बनी करीब 400 मीटर लंबी झील से ही हो रहा है रिसाव

झील के अध्यन करने वाले इस दल में 12 सदस्य हैं. जिनकी रिपोर्ट के बाद ही आगे कोई जानकारी दी जा सगकेगी.सीएम ने कहा कि हमें सावधान और सचेत रहने की ज़रूरत है. वैक्षानिकों के इस दल में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ( DRDO ) के पांच, इसरो के भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान ( IIRAS ) के 4, एसडीआरएफ के 1 और 3 रोबोटिक्स साइंटिस्ट शामिल है. सीएम की माने तो सरकार के पास झील की पूरी जानकारी है. झील पर उपग्रह के माध्यम से निगाह भी रखी जा रही है. वैज्ञानिकों ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक झील करीब 400 मींटर लंबी है. लेकिन गहराई का अनुमान अभी नहीं लगाया जा सका है.

मुख्यमंत्री ने जानकारी देते हुए कहा कि झील के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने के लिए कुछ लोगों को हेलिकॉप्टर से ड्रॉप करने पर भी विचार किया जा रहा है. सीएम ने कहा कि वायुसेना इस काम के लिए तैयार है. सीएम ने कहा कि ऐसे ट्रेंड लोग उपलब्ध हैं जो इस तरह के काम को अंजाम दे सकते हैं. ऐसा होता है तो जांच टीम को इसमें खासी मदद मिलेगी.

ऋषिगंगा में आई आपदा और इलाके में पैदा हुई भौगोलिक अस्थिरता के अध्ययन के लिए सरकार ने एक 9 सदस्यीय एक्सपर्टस की टीम का गठन किय़ा है. उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिशाषी निदेशक की अध्यक्षता में इस नौ सदस्यीय समिति में भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण ( जीएसआई) के उपनिदेशक, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के निदेशक के नामित प्रतिनिधि, भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान के निदेशक के नामित प्रतिनिधि, केंद्रिय भवन अनुसंधान रुड़की के प्रतिनधि, टिहरी जल विद्युत परियोजना, ऋषिकेश के निदेशक तकनीकि के नामित प्रतिनिधि, उत्तराखंड जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक, निदेशक उत्तराखंड अंतरिक्ष केंद्र या उसके नामित प्रतिनिधि को इस दल का सदस्य बनाया गया है. आपदा प्रबंधन के सचिव एए मुरूगेशन ने कमेटी गठन के आदेश भी दे दिये हैं.

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