February 26, 2021

UK LIVE

ख़बर पक्की है

पेयजल ऐजेंसियां ऐसे डुबो रही हैं जनता के लाखों !

उत्तराखंड- उत्तराखंड में पेयजल निर्माण एजेंसियों में तालमेल न होने से जनता के लाखों रुपयों की बर्बादी हो रही है. राज्य में पानी से जुड़े कामों को एडीबी, स्मार्ट सिटी समेत कई दूसरी एजेंसिया करती हैं. वहीं इसके संचालन का जिम्मा जल संस्थान के पास रहता है. राज्य में कई योजनाएं हैं, जिनमें बड़ी रकम खर्च हुई है, लेकिन एक भी योजना कभी खरी नहीं उतरी. कहीं एक करोड़ का ट्यूबवेल फेल हो जाता है, तो कहीं टैंकों में पानी ही नहीं रह गया है.

पेयजल निर्माण एजेंसियों में तालमेल न होने से जनता के लाखों रुपये बर्बाद
फाइल फोटो- पेयजल निर्माण एजेंसियों में तालमेल न होने से जनता के लाखों रुपये बर्बाद

पौड़ी में 90 करोड़ से बनी नानघाट योजना इसका एक जीता-जागता उदाहरण है. इस योजना के तहत जहां लोगों को 7 एमएलड़ी पानी मिलना था, तो वहीं लोगों को साढ़े तीन एमएलड़ी पानी भी नहीं मिल रहा है. जल संस्थान के सीजीएम एस.के. शर्मा ने कहा, कि एक ट्यूबवेल कम से कम 20-25 साल चलता है. इसकी जांच करवाई जा रही है. जल निगम ने जिस कंपनी से काम करवाया था, वहीं कंपनी अब नया ट्यूबवेल बनाएगी.

वहीं गलतियों को एक दूसरे के मत्थे मड़ते हुए जल निगम के मुख्य अभियंता सुभाष चौहान ने बताया, कि जल संस्थान को ट्यूबवेल चलाने नहीं आया, जिसके चलते ट्यूबवेल खराब हुआ. जब ये ठीक चल रहा था, तो इसकी मोटर क्यों बदली गई. साथ ही इसमें तय क्षमता से अधिक का पंप क्यों लगाया गया.

प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो

इसके अलावा भी कई दूसरी योजनाएं बनाई गई हैं जो कि विफल रहीं. 2019 में अमृत योजना के एक करोड़ का ट्यूबवेल बनाया गया, जो कि एक साल बाद ही खराब हो गया. एडीबी के बजट से बीमा विहार में एक से अधिक लागत का टैंक और ट्यूबवेल बनाया गया. जिसमें तय क्षमता से कई गुना कम पानी भर पाता है.

डालनवाला कर्जन रोड पर भी एक ट्यूबवेल बनाया गया, लेकिन 70 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद पता चलाता है, कि जिस जगह निर्माण करवाया जा रहा है, वो विवादित है. जिसके चलते करोड़ो रुपये यूं ही बर्बाद जा रहे हैं. लेकिन इन सब की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता. सब लोग अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेते हैं.

Share, Likes & Subscribe