January 25, 2021

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कोरोना वैक्सीन में सुअर के मांस का सच

कोरोना वैक्सीन में सुअर का मांस ?

नेशनल डेस्क-नई दिल्ली- पूरी दुनिया कोरोना वैक्सीन का इंतजार कर रही है, वही कोरोना वैक्सीन को लेकर इस बीच एक अलग ही बहस छिड़ गई है। कोविड-19 वैक्सीनेशन के अभियान में इस्तेमाल हुई एक चीज बड़ी रूकावट बन सकती है। कोरोना वैक्सीन की सुरक्षा और उसके प्रभाव को बनाए रखने के लिए सुअर के मांस से बने जिलेटिन का बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो रहा है.

वैक्सीनेशन के अभियान में इस्तेमाल हुई एक चीज बड़ी रूकावट
वैक्सीनेशन के अभियान में इस्तेमाल हुई एक चीज बड़ी रूकावट

हालांकि कई कंपनियां सुअर के मांस का इस्तेमाल किए बगैर वैक्सीन बनाने का काम कर रही हैं,लेकिन जानकारी के मुताबिक अभी तक बहुत कम कंपनियों ने इसमें सफलता हासिल की है
वहीं दूसरी ओर दुनियाभर के इस्लामिक धर्मगुरूओं के बीच इस बात को लेकर नराज़गी है कि सुअर के मांस का इस्तेमाल कर बनाए गए कोरोना वैक्सीन इस्लामिक कानून के तहत जायज हैं या नहीं और इसे लगवाना चाहिए या नहीं। जिसके चलते वैक्सीनेशन अभियान के बाधित होने की आशंका जतायी जा रही है।

इस्लामिक धर्मगुरूओं के बीच वैक्सीन में सुअर के मांस के इस्तेमाल से नाराजगी
इस्लामिक धर्मगुरूओं के बीच वैक्सीन में सुअर के मांस के इस्तेमाल से नाराजगी

(पोर्क) से जिलेटिन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। कुछ कंपनियां वर्षो से सुअर के मांस से मुक्त मेनिनजाइटिस का टीका बना रही हैं,जबकि सऊदी अरब और मलेशिया स्थित एजे फार्मा भी इसी तरह के एक टीके पर काम कर रही है. इंडोनेशिया जैसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देशों में चिंता बढ़ गई है। ब्रिटिश इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव सलमान वकार का कहना है,कि ऑर्थोडॉक्स यहूदियों और मुसलमानों समेत विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच टीके के इस्तेमाल को लेकर असमंजस की स्थिती है.जो सुअर के मांस से बने उत्पादों के इस्तेमाल को धार्मिक रूप से अपवित्र मानते हैं।

यदि वैक्सीनेशन का उपयोग नहीं किया गया तो बहुत नुकसान होगा
यदि वैक्सीनेशन का उपयोग नहीं किया गया तो बहुत नुकसान होगा

सिडनी विश्वविघालय में सहायक प्रोफेसर डॉक्टर हरनूर राशिद कहते हैं, कि टीके में पोर्क जिलेटिन के उपयोग पर अब तक हुई विभिन्न परिचर्चा में आम सहमति यह बनी है, कि यह इस्लामी कानून के तहत स्वीकार्य है, क्योंकि यदि वैक्सीनेशन का उपयोग नहीं किया गया तो बहुत नुकसान होगा।
इजराइल की रब्बानी संगठन जोहर के अध्यक्ष रब्बी डेविड स्टेव ने कहा है, यहूदी कानूनों के मुताबिक सुअर का मांस खाना या इसका इस्तेमाल करना तभी जायज है, जब इसके बिना काम न चले उन्होंने कहा कि अगर इसे इंजेक्शन के तौर पर लिया जाए और खाया नहीं जाए तो यह जायज है और इससे कोई दिक्कत नहीं है, बीमारी की हालात में इसका इस्तेमाल विशेष रूप से जायाज है।

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