April 11, 2021

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निरंजनी अखाड़े में कन्या पूजन के साथ शुरू हुए कुंभ से जुड़े धर्मिक कार्य शुरू

निरंजनी अखाड़े में कन्या पूजन के साथ शुरू हुए कुंभ से जुड़े धर्मिक कार्य शुरू

निरंजनी अखाड़े में कन्या पूजन से शुरू हुआ कुंभ से जुड़े धार्मिक कार्यों का शुभारंभ !

उत्तराखंड, हरिद्वार कुंभ 2021, आस्था का मनहापर्व यानि महाकुंभ 2021 सरकारी तिथि के मुताबिक आगामी पहली अप्रैल से शुरू होगा, कुंभ के इतना बिलंब से शुरू होने के पीछे का राज़ है कोरोना महामारी. जिसके चलते आस्था के महापर्व की दशा और दिशा दोनों ही बदल गई. बहरहाल सरकारी महकमें की तरीख कुंभ को भले ही 1 अप्रैल से शुरू करने का एलान कर चुकी हो, लेकिन संतों के अखाड़े में कुंभ मकर संक्राति से ही शुरू हो चुका है.

बहरहाल अब कुंभ नगरी हरिद्वार में नागा साधुओं का पहुंचना शुरू हो चुका है. नागा साधुओं का कुंभ नगरी में पहुंचना अपने आप में एक महोत्सव की तरह होता है. क्योंकि कुंभ ही एक ऐसा पर्व आता है जब नागा साधु इतनी बड़ी तादाद में हरि के द्वार हरिद्वार कुंभ में गंगा स्नान, तप और साधना के लिए आते हैं.

हरिद्वार का निरंजनी अखाड़ा नागा सन्यासियों का सबसे बड़ा अखाड़े में से एक है. निरंजनी अखाड़े में बुद्धवार को कन्या पूजन किया गया. इस कन्या पूजन को विधि विधान से शुरू कर नागा साधु के हाथों कन्याओं को पुष्प माला पहनाकर उनकी पूजा की गई और फिर भोजन भी करवाया गया.

निरंजनी अखाड़े में कन्या पूजन करके शुरू किया कुंभ के धार्मिक कार्यों का शुभारंभ
निरंजनी अखाड़े में कन्या पूजन करके शुरू किया कुंभ के धार्मिक कार्यों का शुभारंभ

निरंजनी अखाड़े में हुई कन्या पूजन के बाद अब निरंजनी अखाड़े के कुंभ से जुड़े सभी धार्मिक अनुष्ठान और कार्य अब प्रारंभ हो गये हैं. नागा साधुओं का कुंभ नगरी में पहुंचना भी शुरू हो चुका है. हरिद्वार स्थित निरंजनी अखाड़ा प्रांगड में पहुंचे सभी नागा साधुओं का स्वागत किया गया.

निरंजनी अखाड़े की पेशवाई यात्रा 3 मार्च को निकाली जाएगी.जिसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल से ही नागा साधुों को हिंदु धर्म के रक्षक के रूप में देखा जाता है. हिंदू धर्म को बचाने में नागा सन्यासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. ऐसे में नागा सन्यासियों को कुंभ में सन्नान का पहला और विशेष स्थान मिलता है. निरंजनी अखाड़े में पहुंचे नागा साधुओं का आखाड़े में विधि विधान से पूजन सत्कार किया गया. इस खास मौके पर अखाड़े में कई धार्मिक कार्य भी संपन्न हुए.

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