February 25, 2021

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“कहानी कुंभ की” कैसे मिला कुंभ को भव्य स्वरूप !

उत्तराखंड- हरिद्वार- विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन कुंभ एक बार फिर हरिद्वार में आयोजित हो रहा है. 48 दिनों तक चलने वाले आस्था के इस मेले में करोड़ो लोग पवित्र स्थल हरिद्वार गंगा में स्नान करने आते हैं. पौराणिक मान्यता है, कि कुंभ में गंगा स्नान करने से किसी भी व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं, और उसे मोक्ष मिल जाता है. यही कारण है, कि कुंभ मेले में संगम तटों पर डुबकी लगाने के लिए श्रध्दालुओं का सैलाब उमड़ता है. हरिद्वार में हर 12 साल बाद कुंभ और 6 साल बाद अर्धकुंभ लगता है.

कुंभ मेले में संगम तटों पर डुबकी लगाने के लिए श्रध्दालुओं का सैलाब उमड़ता है.
संगम तटों पर डुबकी लगाने के लिए हर कुंभ में श्रध्दालुओं का उमड़ता है सैलाब.

धर्मनगरी हरिद्वार में लगने वाला कुंभ मेला 1867 तक सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से ही पूरे कराए जाते थे. 1867 में उमड़ी श्रध्दालुओं के सैलाब को देखकर ब्रिटिश सरकार पहली बार चिंतित नजर आई. और जिसके तहत अंग्रेजों ने कुंभ के तत्काल बाद हरिद्वार के इतिहास की पहली डेवलपमेंट कमेटी गठित की. कमेटी की जिम्मेदारी पुरोहितों और कुछ महंतो को सौंपी गई. यही कमेटी हरिद्वार के प्रबंध के लिए नगरपालिका के गठन का जारिया बनीं. और इसके चलते नगरपालिका की स्थापना 1867 के कुंभ के बाद साल 1868 में कर दी गई.

हरिद्वार में हर 12 साल बाद कुंभ और 6 साल बाद अर्धकुंभ लगता है.
हरिद्वार में हर 12 साल बाद कुंभ और 6 साल बाद लगता है अर्धकुंभ.

कुंभ के लिए रेलवे ने भी दिया अपना योगदान- नगरपालिका के आरंभिक कार्य तीर्थयात्रियों की आने वाली भीड़ के लिए प्रबंध करने तक सीमित रखे गए. बाद में इस काम की शुरूआत होती गई. और साल 1879 के कुंभ में फिर से लोगों की भारी भीड़ हरिद्वार आई. सरकार ने हरिद्वार को रेलमार्ग से जोड़ने का काम करना शुरू कर दिया और यह काम इतनी तेजी से चला कि 1885 तक हरिद्वार रेलमार्ग से जुड़ गया. और जिससे श्रध्दालुओं को काफी आराम मिला.

कुंभ पर आने वाली भीड़ के प्रबंधन में रेलवे ने योगदान दिया, जिसमें साल 1891 में हरिद्वार-देहरादून रेलमार्ग और 1926 में हरिद्वार ऋषिकेश रेलमार्ग बनकर तैयार हुआ. हरिद्वार के साथ-साथ उत्तर में मोतीचूर और दक्षिण में ज्वालापुर में भी रेलवे स्टेशन बनाए गए. देश के तमाम शहरों से यात्रियों को कुंभ नगर लाया जाना था, जिसको देखते हुए भविष्य के लिए अंग्रेजों ने लक्सर को रेलवे जंक्शन के रूप में विकसित किया.

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