January 21, 2021

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देहरादून से दिल्ली बनेगा एक्सप्रेसवे

ढाई घंटे का राजधानी एक्सप्रेस-वे, ये है रूट-मैप !

उत्तराखंड– देहरादूनदिल्ली जाने वालों के लिए अच्छी खबर, केवल ढाई घंटे का रह जाएगा सफर. जनवरी 2019 में एनएचएआई से देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे बनाने की मंजूरी मिलने के बाद, ये मामला भारतीय वन्यजीव बोर्ड से अनुमति पर अटका था. लेकिन भारतीय वन्यजीव बोर्ड से इस परियोजना को हरी झंडी दिखा दी गई है. 180 किमी. के इस एक्सप्रेसवे के बनने से मात्र ढाई घंटे में देहरादून से दिल्ली पहुंचा जा सकेगा. ये एक्सप्रेसवे दून से सहारनपुर, शामली, बागपत होते हुए दिल्ली से जुड़ेगा. क्योंकि ये है ढाई घंटे का राजधानी एक्सप्रेस-वे, ये है रूट-मैप !

देहरादून-दिल्ली सफर होगा आसान, बनेगा एलिवेटेड एक्सप्रेस-वे ऍ

देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के लिए पिछले साल जनवरी में मंजूरी दी गई थी. उस समय एनएचएआई के चैयरमैन एसएस संधू ने कहा था, कि ये एलिवेटिड रोड होगा. इसमें कुछ हिस्सा राजाजी पार्क और कुछ हिस्सा उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्र का है. इसी को देखते हुए एनएचएआई ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से भारतीय वन्यजीव बोर्ड से सहमति के लिए कोशिश का आग्रह किया था.

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस. सुहाग ने बताया, कि हाल ही में भारतीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दे दी गई है. परियोजना के तहत देहरादून के निकट डाटकाली मंदिर के पास राज्य सीमा पर सुरंग का निर्माण भी कराया जाएगा.

दिल्ली से देहरादून- एलिवेटेड हाई-वे से लगेगे महज़ 2.30 घंटे !

जानकारी के मुताबिक एक्सप्रेसवे के निर्माण में उत्तर प्रदेश के गणेशपुर से लेकर देहरादून के बीच करीब 20 किमी. का हिस्सा राजाजी टाईगर रिजर्व पार्क और शिवालिक एलिफेंट रिजर्व पार्क का है. जिसके लिए वन्यजीव बोर्ड की सहमति की जरुरत थी. शिवालिक क्षेत्र में स्थित साल के जंगल में 2.5 हजार साल पुराने पेड़ों के कटने का अनुमान लगाया जा रहा है. जिसको लेकर पर्यावरणविद चिंता जता रहे हैं.

वन विभाग के मुताबिक भारतीय वन्यजीव बोर्ड ने न्यूनतम नुकसान के आधार पर इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है. एक्सप्रेसवे को दिल्ली और देहरादून की कनेक्टिविटी के लिहाज से प्रदेश सरकार बहुत जरुरी मान रही है. वन मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा, कि एक्सप्रेसवे से दिल्ली और देहरादून के बीच एक्सप्रेसवे बनने से आवागमन आसान होगा. जो कि प्रदेश के लिए वरदान साबित होगा. पर्यावरम के नुकसान को कम से कम करने का प्रयास किया जाएगा, जिस पर नजर रखी जाएगी.

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