January 26, 2021

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छात्रों के कोविड टेस्ट पर कन्फ्यूज़न

क्या उत्तराखंड लौटने वाले स्टूडेंट्स के लिए ज़रूरी होगा कोविड-टेस्ट !

उत्तराखंड – उच्च शिक्षा – कोरोना काल ने जिंदगी ऐसी बदली, कि पटरी पर लौटने में तमाम मुश्किलें आ रहीं हैं । नौनिहालों का भविष्य तक दांव पर लग गया है । शिक्षा व्यवस्था तक लाख कोशिशों के बावजूद पटरी पर वापस नहीं लौट पा रही । जबकि केंद्र से लेकर राज्य सरकारें सब हर जतन-कोशिश में जुटे हुए हैं ।

बात अगर अपने राज्य उत्तराखंड की करें तो फिलहाल 15 दिसंबर से खुलने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों पर कोविड का काला साया अब भी मंडरा रहा है। उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के कोविड टेस्ट को लेकर शासन प्रशान में असमंजन की स्थिति बरकारार है ।

कोविड टेस्ट पर कन्फ्यूजन !

विभाग की ओर से जो एसओपी जारी हुई उसे देखकर ये साफ है, कि जो छात्र बाहरी राज्यों से वापस उत्तराखंड लौटेंगे उन सबके लिए कोविड टेस्ट करवाना जरूरी होगा। जबकि इसी आदेश को दूसरे तरीके से प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा आनंद बर्द्धन बताते हुए कहते हैं कि वापस राज्य में लौटने वाले सभी छात्र-छात्रओं को जांच करानी होगी ।

जबकि अगर हम राज्य के उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत के कथन पर गौर फरमाएं तो वो कहते हैं कि स्थानीय डे स्कॉलर्स को कोरोना जांच नहीं करवानी होगी।

मतलब अलग-अलग बयानवाजी के चलते कंन्फ्यूज़न हो गया बहुत ज्यादा । और ये भ्रम साफ तौर पर उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी हुई एसओपी और राज्यमंत्री की बातों में झलकता दिखाई पड रहा है। क्योंकि एसओपी में साफ कहा गया है कि बाहरी राज्यों के उन छात्रों के लिए कोविड टेस्ट की अनिवार्यता की गई है जो या तो हॉस्टल में रहते हैं या डे-स्कॉलर्स हैं ।

मतलब असमंजन ये है, कि कोविट टेस्ट बाहरी राज्यों के छात्रों को ही करवाना होगा या फिर सभी छात्रों को । राज्य भर में फैले 105 राजकीय कॉलेजों में 1 लाख से भी ज्यादा स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं ।

बहरहाल शासन-प्रशासन को इस मसले पर गहन मंथन करके जल्द एक नये आदेश को जारी करना चाहिए, ताकि जो छात्र-छात्राएं एक लंबे अरसे के बाद अपनी पढ़ाई पर वापस लौट रहे हैं वो सुकून के साथ वापस एक नई ऊर्जा लेकर अपनी पढ़ाई शुरू कर सकें ।

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