April 10, 2021

UK LIVE

ख़बर पक्की है

ड्रोन पहुंचाएगा वैक्सीन, कोल्ड स्टोरेज बना समस्या !

कोरोना जो पूरी दुनिया को एक तबाही का मंजर दिखा गया, अब खत्म होने के अंतिम पड़ाव पर है। कोरोना वैक्सीन का भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व बेसब्री से इंतजार कर रहा है। वहीं बताया जा रहा है, कि भारत में वैक्सीन का निर्माण अब कुछ कदम ही दूर है। इस वैक्सीन को लोगों तक पहुंचाने और रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज की एक बड़ी समस्या सामने आ रही है। जिससे निपटने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। यानि ड्रोन पहुंचाेगा वैक्सीन, कोल्ड स्टोरेज बना समस्या !

कोरोना वैक्सीन का निर्माण अपने अंतिम चरण पर
कोरोना वैक्सीन का निर्माण अपने अंतिम चरण पर

कोरोना वैक्सीन को दुर्गम क्षेत्रों में रह रहे लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सके, इसके लिए सरकार ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल कर रही है। ड्रोन के ज़रिए वैक्सीन को लोगों तक सफलतापूर्वक पहंचाया जा सके, इसके लिए ट्रायल शुरु कर दिए गए हैं। इसका पहला ट्रायल नवम्बर में किया गया था।

दुर्गम क्षेत्रों तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए किया जाएगा ड्रोन का उपयोग
दुर्गम क्षेत्रों तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए किया जाएगा ड्रोन का उपयोग

उत्तराखंड ड्रोन एप्लीकेशन एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर अमित सिन्हा ने कहा, कि कोरोना वैक्सीन को दुर्गम स्थानों तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य है। जिसके लिए ड्रोन जैसी तकनीकी का इस्तेमाल किया जा रहा है। जो कि एक प्रभावी और समय को बचाने वाला आसान तरीका है। वहीं ट्रायल की जानकारी देते हुए बताया, कि ट्रायल प्रोसेस शुरु करने से पहले डीजीसीए से अनुमति लेनी होगी।
उत्तराखंड सरकार केन्द्र को अब तक 94,000 स्वास्थ्य कर्मचारियों की लिस्ट वैक्सीनेशन के लिए भेज चुकी है। जिसमें डाक्टर्स, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, मेडिकल स्टूडेंट्स, आशा वर्कर, एएनएम और अन्य कर्मचारी शामिल हैं।

कोल्ड स्टोरेज जैसी समस्याओं से निपटने की हो रही हैं तैयारियां
कोल्ड स्टोरेज जैसी समस्याओं से निपटने की हो रही हैं तैयारियां

इससे पहले जून 2019 में एक अनमैन्ड एरीयल व्हीकल के ज़रिए टिहरी के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से लगभग 36 किमी. दूर ब्लड सैंपल भेजे गए थे। किसी गाड़ी को ये दूरी तय करने में करीब 70 से 100 मिनट लगता है, वहीं यूएवी के ज़रिए इस दूरी को तय करने में सिर्फ 18 मिनट का ही वक्त लगा था। आपको बता दें, कि अनमैन्ड एरीयल व्हीकल बिना पायलेट के उड़ने वाला एक एयरक्राफ्ट होता है।

अमित सिन्हा ने कोल्ड स्टोरेज का भी ज़िक्र किया। जिसमें उन्होंने बताया, कि वैक्सीन को -5 से -80 डिग्री तापमान पर रखा जाएगा। जिसके लिए वे टेम्परेचर कंट्रोल करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। अभी तक 5 से 7 डिग्री तापमान मैनेज किया जा चुका है। लेकिन आगे के होने वाले कामों के लिए टैक्निकल गाइडेंस ली जा रही है।

Share, Likes & Subscribe