April 10, 2021

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छात्रा को थमाई फर्जी डिग्री

दलालों के झांसे में फंसी छात्रा, फर्जी डिग्री होने पर भरना पड़ा 15000 का जुर्माना

उत्तर प्रदेश- आगरा के हाईकोर्ट ने डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्र्वविद्यालय की फर्जी डिग्री को लगाने पर वादी पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। ऐसा कहा जा रहा है, कि एक महीने के अंदर ही कुलसचिव के अकाउंट में पूरी धनराशि जमा करने का आदेश दिया गया है।

बस्ती मंडल के माध्यमिक विद्यालय की सहायक अध्यापिका रीना की साल 2007 की बीएड डिग्री को बस्ती मंडल के शिक्षा निदेशक ने प्रमाणित करने के लिए विश्र्वविद्यालय को भेजा था। जांच के बाद विश्र्वविद्यालय ने डिग्री को फर्जी घोषित कर दिया और उसको स्वीकृत करने से मना कर दिया। जिसके बाद रीना ने हाईकोर्ट में अपनी डिग्री को सही बताया।

अध्यापिका रीना की साल 2007 की बीएड डिग्री को बताया फर्जी
अध्यापिका रीना की साल 2007 की बीएड डिग्री को बताया फर्जी

8 दिसंबर को डॉ. राजीव कुमार, विश्र्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक, ने हाईकोर्ट में काउंटर दाखिल किया। जिसमें डिग्री को फर्जी साबित बताया गया था।
डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि वादी ने अपना रोल नंबर 71899189 हाईकोर्ट में पेश किया। विश्र्वविद्यालय के हाईकोर्ट में दर्शाए गए रिकॉर्ड के मुताबिक आखिरी रोल नंबर 7189187 तक ही हैं। जो बाईपास रोड के एमडी कॉलेज के एक छात्र का था। वादी अभी तक अपने विश्र्वविद्यालय की छात्रा होने का प्रमाण नहीं दे पाई है। ऐसे में कई विश्र्वविद्यालयों की फर्जी डिग्री के केस सामने आए हैं। विश्र्वविद्यालय के दलालों ने रीना जैसी मासूम छात्रा को अपने जाल में फंसाया। सबसे पहले रीना को बीएड साल 2007 की फर्जी डिग्री दी गई। उसके बाद एक फर्जी प्रमाणपत्र भी भेज दिया गया था, जिसके बाद इस मामले का खुलासा हुआ।

युवती को हाथों में थमाई फर्जी डिग्री
युवती को हाथों में थमाई फर्जी डिग्री

22 जून 2020 को बरेली के मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) की ओर से डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्र्वविद्यालय को सत्यापन के लिए प्रमाणपत्र भेजे गए थे। जबकि 23 सितंबर 2020 को जेडी कार्यालय को सत्यापन रिपोर्ट मिली। विश्र्वविद्यालय में अधिकारियों से पूछताछ के बाद पता चला, कि सत्यापन रिपोर्ट फर्ज़ी है। क्योंकि जिस प्रस्ताव से वो सत्यापन रिपोर्ट भेजी गई थी, उससे साफ साफ पता चल रहा था, कि वो रिपोर्ट विश्र्वविद्यालय की नहीं थी। हालांकि जेडी ने जो पत्र के पत्रांक भेजे थे, उनका प्रमाण भी दिया गया था। अभी तक प्रकरण में विश्र्वविद्यालय की तरफ से सही सत्यापन रिपोर्ट नहीं भेजी गई है।

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